तुम्हारे बिना भी.......

 तुम्हारे बिना भी ,

रोज सवेरा आएगा।

तुम्हारे बिना भी ,

रोज दिन ढलेगा। 

तुम्हारे बिना भी ,

रोज शाम आएगी।

पर तुम्हारे बिना ,

मुझे नींद कैसे आएगी?

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तुम्हारे बिना भी ,

मैं रोज काम पर जाऊंगा।

तुम्हारे बिना भी,

मैं रोज इस ही बिस्तर पर वापस आऊंगा।

तुम्हारे बिना भी ,

मैं रोज तुम्हारी तस्वीरें देखूंगा।

पर तुम्हारे बिना ,

मुझे तुम्हारी खुशबू कैसे आएगी?

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तुम्हारे बिना भी,

रोज पक्षी चहचहाएंगे।

तुम्हारे बिना भी ,

रोज तारे टीम तिमाएंगे।

तुम्हारे बिना भी,

मैं रोज किताबे पढ़ूंगा।

पर तुम्हारे बिना ,

मेरी शाम कैसे पूरी हो पाएगी?

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तुम्हारे बिना भी ,

मैं रोज गलतियां करूंगा।

तुम्हारे बिना भी,

मैं रोज अपना रुमाल भूलूंगा।

तुम्हारे बिना भी,

मैं रोज चश्मा लगाए ही सो जाया करूंगा।

पर तुम्हारे बिना ,

मैं तुम्हारी डांट कैसे सुन पाऊंगा?

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तुम्हारे बिना भी,

मैं रोज गीत सुनूंगा।

तुम्हारे बिना भी ,

मैं रोज गीत गाऊंगा।

तुम्हारे बिना भी,

मैं रोज कविताएं लिखूंगा।

पर तुम्हारे बिना ,

मै वो कविताएं किसे सुनाऊंगा?

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तुम्हारे बिना भी, 

एक जिंदगी होगी ,

पर क्या वो जिंदगी,

 सचमुच जिंदगी होगी?

                       

                       ~ अनंत

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