तुम्हारे बिना भी.......
तुम्हारे बिना भी ,
रोज सवेरा आएगा।
तुम्हारे बिना भी ,
रोज दिन ढलेगा।
तुम्हारे बिना भी ,
रोज शाम आएगी।
पर तुम्हारे बिना ,
मुझे नींद कैसे आएगी?
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तुम्हारे बिना भी ,
मैं रोज काम पर जाऊंगा।
तुम्हारे बिना भी,
मैं रोज इस ही बिस्तर पर वापस आऊंगा।
तुम्हारे बिना भी ,
मैं रोज तुम्हारी तस्वीरें देखूंगा।
पर तुम्हारे बिना ,
मुझे तुम्हारी खुशबू कैसे आएगी?
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तुम्हारे बिना भी,
रोज पक्षी चहचहाएंगे।
तुम्हारे बिना भी ,
रोज तारे टीम तिमाएंगे।
तुम्हारे बिना भी,
मैं रोज किताबे पढ़ूंगा।
पर तुम्हारे बिना ,
मेरी शाम कैसे पूरी हो पाएगी?
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तुम्हारे बिना भी ,
मैं रोज गलतियां करूंगा।
तुम्हारे बिना भी,
मैं रोज अपना रुमाल भूलूंगा।
तुम्हारे बिना भी,
मैं रोज चश्मा लगाए ही सो जाया करूंगा।
पर तुम्हारे बिना ,
मैं तुम्हारी डांट कैसे सुन पाऊंगा?
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तुम्हारे बिना भी,
मैं रोज गीत सुनूंगा।
तुम्हारे बिना भी ,
मैं रोज गीत गाऊंगा।
तुम्हारे बिना भी,
मैं रोज कविताएं लिखूंगा।
पर तुम्हारे बिना ,
मै वो कविताएं किसे सुनाऊंगा?
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तुम्हारे बिना भी,
एक जिंदगी होगी ,
पर क्या वो जिंदगी,
सचमुच जिंदगी होगी?
Beautiful✨❤❤
ReplyDeleteThank you❤️
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